Chapter 12 Bhor Aur Barkha
April 4, 2025Chapter 14 Sangharsh Ke Kaaran Mein Turukmizaj Ho Gaya: Dhanraj
April 4, 2025NCERT Solutions: वीर कुंवर सिंह
प्रश्न-अभ्यास
निबंध से
प्रश्न 1: वीर कुँवर सिंह के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?
उत्तर: वीर कुँवर सिंह के व्यक्तित्व की निम्न विशेषताएँ मुझे प्रभावित करती हैं –
- साहस: कुँवर सिंह का पूरा जीवन ही उनके साहसपूर्ण घटनाओं से भरा पड़ा है। उनका अपनी घायल भुजा को स्वयं काटकर गंगा में समर्पित कर देना साहस का सबसे अद्वितीय उदहारण है।
- उदारता: कुँवर सिंह का व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। उनकी हालत अच्छी न होने के बावजूद वे निर्धनों की हमेशा सहायता करते थे। इसी उदारता के फलस्वरूप उन्होंने कई तालाबों, कुँओं, स्कूलों तथा रास्तों का निर्माण किया।
- स्वाभिमानी: कुँवर सिंह स्वाभिमानी व्यक्ति थे यह इसी बात से पता चलता है कि वयोवृद्ध होने के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों के आगे अपने घुटने नहीं टेके।
- सांप्रदायिक सद्भाव: सांप्रदायिक सद्भाव में कुँवरसिंह की गहरी आस्था थी इसलिए इब्राहिम खाँ और किफायत हुसैन उनकी सेना में धर्म के आधार पर नहीं अपितु कार्यकुशलता और वीरता के कारण उच्च पद पर आसीन थे। उनके यहाँ हिन्दुओं के और मुसलमानों के सभी त्योहार एक साथ मिलकर मनाए जाते थे।
प्रश्न 2: कुँवर सिंह को बचपन में किन कामों में मजा आता था? क्या उन्हें उन कामों से स्वतंत्रता सेनानी बनने में कुछ मदद मिली?
उत्तर: वीर कुंवर सिंह को बचपन में पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा घुड़सवारी करने, तलवारबाजी करने तथा कुश्ती लड़ने में मजा आता था। जब बड़े होकर स्वतंत्रता सेनानी बने तो इन कार्यों से उन्हें बहुत सहायता मिली। तलवार चलाने व तेज़ घुड़सवारी से तो वे कदम-कदम पर अंग्रेजों को मात देते रहे।
प्रश्न 3: सांप्रदायिक सद्भाव में कुँवर सिंह की गहरी आस्था थी- पाठ के आधार पर कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर: कुँवर सिंह की सांप्रदायिक सद्भाव में गहरी आस्था थी। उनकी सेना में मुसलमान भी उच्च पदों पर थे। इब्राहीम खाँ तथा किफ़ायत हुसैन उनकी सेना में उच्च पदों पर आसीन थे। उनके यहाँ हिंदुओं तथा मुसलमानों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करते थे। उनके यहाँ दोनों धर्मों के त्योहार एक साथ मनाए जाते हैं। इतना ही नहीं उन्होंने पाठशालाओं के साथ मकतबों का भी निर्माण कराया।
प्रश्न 4: पाठ के किन प्रसंगों से आपको पता चलता है कि कुँवर सिंह साहसी, उदार एवं स्वाभिमानी व्यक्ति थे?
उत्तर:
- साहसी व्यक्ति: कुँवरसिंह का पूरा जीवन ही उनके साहसपूर्ण घटनाओं से भरा पड़ा है। उनका अपनी घायल भुजा को स्वयं काटकर गंगा में समर्पित कर देना साहस का सबसे अद्वितीय उदहारण है।
- उदार व्यक्ति: कुँवरसिंह का व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। उनकी हालत अच्छी न होने के बावजूद वे निर्धनों की हमेशा सहायता करते थे। इसी उदारता के फलस्वरूप उन्होंने कई तालाबों, कुँओं, स्कूलों तथा रास्तों का निर्माण किया।
- स्वाभिमानी व्यक्ति: कुँवरसिंह स्वाभिमानी व्यक्ति थे यह इसी बात से पता चलता है कि वयोवृद्ध होने के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों के आगे अपने घुटने नहीं टेके।
प्रश्न 5: आमतौर पर मेले मनोरंजन, खरीद फ़रोख्त एवं मेलजोल के लिए होते हैं। वीर कुँवर सिंह ने मेले का उपयोग किस रूप में किया?
उत्तर: प्रायः मेले का उपयोग मनोरंजन, खरीद-फरोख्त तथा मेलजोल के लिए किया जाता है, लेकिन कुँवर सिंह ने सोनपुर के मेले का उपयोग स्वाधीनता संग्राम की योजना बनाने के लिए किया। उन्होंने यहाँ सोनपुर के मेले का उपयोग अंग्रेजों के विरुद्ध अपनी बैठकों एवं योजनाओं के लिए किया। यहाँ लोग गुप्त रूप से इकट्ठे होकर क्रांति के बारे में योजनाएँ बनाते थे। सोनपुर में एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला लगता है। इसका आयोजन कार्तिक पूर्णिमा पर होता है। इस मेले में हाथियों की खरीद-बिक्री होती है। इस मेले की आड़ में कुँवर सिंह अंग्रेजों को चकमा देने में सफल रहे।
निबंध से आगे
प्रश्न 1: सन् 1857 के आंदोलन में भाग लेनेवाले किन्हीं चार सेनानियों पर दो-दो वाक्य लिखिए।
उत्तर:
- रानी लक्ष्मीबाई: झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई स्वाधीनता संग्राम की प्रथम महिला थीं, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई थी। वह स्वाभिमानिनी, कुशल योद्धा, कुशल प्रशासिका, विदुषी, भागवत गीता के सिद्धांतों को मानने वाली थी। अंग्रेजों से अंत तक लड़ती रही। लड़ते-लड़ते 23 वर्ष की अल्पायु में वीरगति को प्राप्त हो गई।
- मंगल पांडे: अंग्रेजी सेना का सिपाही मंगल पांडे कट्टर धर्मावलंबी था। कारतूस में गाय और सुअर की खबर फैलने के बाद उन्होंने विद्रोह की शुरुआत की थी।
- तात्या टोपे: तात्या टोपे का मूल नाम रामचंद्र पांडुरंग था। ये झाँसी की रानी की सेना में सेनापति थे। इन्हें 18 अप्रैल, 1859 को फाँसी पर लटका दिया गया था।
- बहादुर शाह ज़फ़र: मई, 1857 में विद्रोहियों ने दिल्ली पर कब्जा करके बहादुर शाह दुवितीय को पुनः भारत का सम्राट घोषित कर दिया। 82 वर्षीय बहादुर शाह ने बख्त खाँ के सहयोग से विद्रोह का नेतृत्व किया था। उन्हें अपना शेष जीवन रंगून के जेल में बिताना पड़ा।
प्रश्न 2: सन् 1857 के क्रांतिकारियों से संबंधित गीत विभिन्न भाषाओं और बोलियों में गाए जाते हैं। ऐसे कुछ गीतों को संकलित कीजिए।
उत्तर: सन् 1857 से संबंधित गीत:
(क) 1857 की जंग ए आज़ादी का क़ौमी गीत !
हम हैं इसके मालिक , हिन्दुस्तान हमारा ,
पाक वतन है क़ौम का , जन्नत से भी प्यारा ,
ये है हमारी मिलकियत , हिन्दुस्तान हमारा,
इसकी रूहानियत से रोशन है , जग सारा।
कितनी क़दीम , कितनी नईम , सब दुनिया से न्यारा ,
करती है , जरखेज जिसे , गंग ओ जमुन की धारा ,
ऊपर बर्फीला परवत , पहरेदार हमारा।
नीचे साहिल पर बजता , सागर का नक्कारा।
(ख) सन् 1857 के क्रांतिकारियों से संबंधित एक भोजपुरी गीत:
“अब छोड़ रे फिरंगिया ! हमारा डेस्वा लूटपाट केले तहँ, मजवा उड़ेले कैलस, देस पर जुल्म जोर” ।
अनुमान और कल्पना
प्रश्न 1: वीर-कुँवर सिंह का पढ़ने के साथ-साथ कुश्ती और घुड़सवारी में अधिक मन लगता था। आपको पढ़ने के अलावा और किन-किन गतिविधियों या कामों में खूब मज़ा आता है? लिखिए?
उत्तर: वीर कुँवर सिंह का पढ़ने के साथ-साथ कुश्ती और घुड़सवारी में बहुत मन लगता था उसी प्रकार मेरी भी बहुत गतिविधियां है या काम है जिसमें मुझे खूब मजा आता है या मैं उसमें खूब रुचि लेती हूं जैसे: नाचना, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना तथा घर के काम करना या खाना पकाना आदि इन सब गतिविधियों में मुझे खूब आनंद आता है ।
प्रश्न 2: सन् 1857 में अगर आप 12 वर्ष के होते तो क्या करते? कल्पना करके लिखिए।
उत्तर: 1857 में यदि मैं 12 वर्ष का होता तो अवश्य वीर सेनानियों के कार्यों से प्रभावित होता। मैं भी तलवार चलाना व घुड़सवारी आदि सीखता ताकि बड़ा होकर सैनिक बन पाता। लोगों में देश-प्रेम की भावना जागृत करने का भी प्रयास करता।
प्रश्न 3: अनुमान लगाइए, स्वाधीनता की योजना बनाने के लिए सोनपुर के मेले को क्यों चुना गया होगा?
उत्तर: स्वाधीनता की योजना बनाने के लिए सोनपुर के मेले को इसलिए चुना गया होगा कि सोनपुर का मेला एशिया का सबसे बड़ा मेला है। इसमें काफ़ी भीड़ होती है तथा तरह-तरह के हाथियों की खरीद-बिक्री की जाती है। इस मेले में इतनी भीड़ होती थी कि यदि स्वतंत्रता सेनानी यहाँ कोई योजना बनाने के लिए इकट्ठे हो जाएँ तो अंग्रेजी सरकार को कभी शक नहीं हो सकता था।
भाषा की बात
प्रश्न: आप जानते हैं कि किसी शब्द को बहुवचन में प्रयोग करने पर उसकी वर्तनी में बदलाव आता है जैसे – सेनानी एक व्यक्ति के लिए प्रयोग करते हैं और सेनानियों एक से अधिक व्यक्तियों के लिए । सेनानी शब्द की वर्तनी में बदलाव यह हुआ है कि अंत के नी से यह नि हो गई । ऐसे शब्दों को जिनके अंत में दीर्घ ईकार होता है बहुवचन बनाने पर वह इकार हो जाता है, यदि शब्द के अंत में हस्व इकार होता है तो उसमें परिवर्तन नहीं होता जैसे दृष्टि से दृष्टियों ।
नीचे दिए गए शब्दों के वचन बदलिए –उत्तर:
- नीति – नीतियों
- जिम्मेदारियों – जिम्मेदारी
- सलामी – सलामियों
- स्थिति – स्थितियों
- स्वाभिमानी – स्वाभिमानियों
- गोली – गोलियाँ